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दूध वाला भैया

वह भैया है या अंकल उसे नहीं पता, बस वह इतना जानता है कि उसका जन्म दूध बेचने के लिए ही हुआ है। बाप-दादा यही करते रहे, सो उसे भी यही करना है। बाप-दादा भी यह जानते थे कि उसे यही करना है, इसीलिए जब वह सातवीं क्लास में अपने मास्साहब की कलाई काट कर घर भाग आया था, तो वे दोनों जोर से हँस पड़े थे।
वह रोज गाँव से शहर आता है दूध बेचने। पहले साइकिल से आता था, लेकिन इधर एक साल पहले जब उसने दाढ़ी वाले नेताजी के मुंह से विकास का नाम और मतलब सुना था, तब से वह रात दिन अपने विकास की फ़िक्र में घुलने लगा था, लिहाजा उसके बाप ने उसकी शादी कर दहेज़ में एक मोटरसाइकिल मांग ली। तो वह अब दूध बेचने मोटरसाइकिल पर गाँव से शहर आता है।
अभी चार-पांच दिन पहले की बात है। अखबार में छपा था कि भीषण गर्मी पड़ रही है। तापमान ४७ डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था। उस दिन, वह अपनी मोटरसाइकिल से दूध देने शहर की और भागा जा रहा था। अचानक शहर से दस किलोमीटर पहले उसकी मोटरसाइकिल भुक-भुक कर बंद पड़ गई। अभी वह नीचे उत्तर कर यह समझने की कोशिश ही कर रहा था कि कल रात दस बजे तक अच्छी चलने वाली मोटरसाइकिल, आज अचानक क्यों बंद पड़ गई कि सड़क से गुज…
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मलयालम के प्रख्यात कवि कुरिपुज्झा श्रीकुमार (के. श्रीकुमार) की कविताएँ

१). छुट्टी

हे भगवान !
गणित के अध्यापक
छुट्टी पर होने चाहिए

गणित अध्यापक आए
डाँट भी पड़ी

भगवान छुट्टी पर थे।


२).  सिद्धांत

कविता पढ़ी
जरा भी समझ में नहीं आयी

तब इस सिद्धांत का जन्म हुआ
"पढ़ने पर जो समझ न आए
वही होती है कविता।"


3).  भगत सिंह

भगत सिंह फांसी पर चढ़ाए गए
फांसी पर लटक कर वे मर गए
क्यों?
भगत सिंह नास्तिक थे क्या?
अगर वे नास्तिक थे
तो मैं भी नास्तिक हूँ।


४).  पंख

भीतर एक पंख है
नील चिड़िया के आँसूं से भीगा हुआ एक पंख
मेरे खून में डुबकी लगाते हुए
पंख एक दर्दीला गीत लिख गया मेरे चेहरे पर
पंख को तेज झोंका उड़ा ले गया
मैं अकेले बैठ रोने लगा।


५).  अवार्ड

शिक्षक वासुकुट्टी को
सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का अवार्ड मिला
गाजे-बाजे के साथ उनको लाया गया
उस समारोह में जहाँ उनका सत्कार किया जाएगा

आनंदन शिक्षक ने कहा कि
अवार्ड पाने के लिए शिक्षक वासुकुट्टी ने जो किया है
उसके लिए एक और अवार्ड दिया जाना चाहिए उनको


६).  धार्मिक आख्यान 

कंप्यूटर ऑफ किया
मिक्सी में पीसकर तैयार
और ठंडा करने के लिए फ्रीज में रखे शरबत को पीकर
सिलाई मशीन से सिले कपडे पहनकर
बिजली के बल्ब के रोशनी में
माइक पकड़
वह विज्ञानं के ख…

देश की भाषा : एक सपना

एक विशाल स्टेडियम से उस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देश भर के टेलीविज़न चैनलों पर जारी था, जिसे मैं सपने में देख रहा था। कार्यक्रम इतना भव्य था कि स्वप्न में भी मैं पलकें नहीं झपका पा रहा था। खचाखच भरे उस स्टेडियम में सुई रखने भर की भी जगह शेष न थी। विविध भाषाओं वाले इस देश की एक भाषा चुनने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। स्टेडियम में सभी राजमान्य भाषाओं के लिए उनके राज्य के भौगोलिक आकार के लिहाज से दीर्घाएं बनाई गई थीं। उन दीर्घाओं में, उन-उन भाषाओं के लेखक और विद्वतजन विराजमान थे। सभी अपनी-अपनी भाषा को देश की भाषा बनाए जाने की पुरजोर पैरवी कर रहे थे। कोई संस्कृत को प्राचीन और विज्ञानसम्मत भाषा बता रहा था, तो कोई तमिल और मराठी के पक्ष में तार्किक प्रस्ताव रख रहा था। जिस भी लेखक या विद्वान को अपनी बात कहना होता वह स्टेडियम के बीचो-बीच बने मंच पर आता, अपना नाम, अपनी भाषा बताता और तब अपनी भाषा के पक्ष में अपना तर्क प्रस्तुत करता। देश की सभी राजमान्य भाषाओं के प्रतिनिधि बोल चुके थे। संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से आए पर्यवेक्षकों ने पूछा, "क्या कोई और है जो इस स्टेडियम में है और…

लघु कथा

थप्पड़ 
यह उस समय की बात है जब शहरों में नए-नए कंक्रीट के जंगल उगने शुरू हुए थे। सड़क के किनारे के पेड़ इसलिए काट दिए गए थे कि उनसे कंक्रीट के तीन, पांच, सात मंजिला इमारतों की शोभा बिगड़ती थी। घरों के भीतर के पेड़ इसलिए काटे गए थे कि उनसे इन इमारतों को ऊँचा बनाने में अवरोध होता था। लेकिन हथेली की पाँचों उँगलियाँ बराबर नहीं होती है, सो शहर में ऐसे लोग भी थे, जो न अपने घरों को इमारत बना रहे थे, न ही घर के सामने अथवा भीतर के पेड़ काट रहे थे।  मैं एक रोज शहर के इसी वृक्ष-वल्लरी मोहल्ले से गुजर रहा था। मार्च का महीना था। इस मोहल्ले में तरह-तरह के पेड़ थे। आम के वृक्षों पर बौर थी। अशोक के वृक्ष पतझड़ से त्रस्त थे। गुलमोहर खिले-खिले झूम रहे थे। बोगनविलिया मानों इस मोहल्ले का तोरण थी। एक घर के सामने सात-आठ वर्ष की एक बच्ची उछल-उछल कर अमरूद तोड़ने का प्रयास कर रही थी। उस घर के सामने अमरूद का पेड़ कच्चे-पके अमरूदों से लदा पड़ा था और सिर्फ एक ही बच्ची अमरूद खाने को उतावली थी! मोहल्ले के बाकी बच्चे कहाँ थे? हो सकता है मोहल्ले में बच्चे ही न हों? या फिर हो सकता है उन बच्चों के माता-पिता ने उन्हें…

कहानी विधा के एक प्रखर समकालीन नाम साथी कैलाश वानखेड़े जी के सलाह पर प्रतिष्ठित मराठी कवि प्रसेनजीत गायकवाड़ की मराठी कविताएँ और फिर उनका अंग्रेजी अनुवाद …

1. कवितेच्या गर्भातून
वेदनेला अर्थवाया शब्द शब्द गोळा केला एका एका अक्षरासी तप तप दिस गेला
युगे युगे धुंडाळली तेव्हा आली एक ओळ जरा जरा टिचू लागे दु:ख कल्पांताची खोळ
ओळ ओळ जुळू लागे देही मनी उठे कळ झळ लागे रोमरोमी प्राणातून सळसळ
वेदनांच्या ओझ्याखाली एका क्षणी निर्वाणलो कवितेच्या गर्भातून आणि पुन्हा जन्मा आलो
अंग्रेजी अनुवाद 
From the Embryo of poetry
Gave meaning to anguishes accumulated each of the word for every alphabet a day became years of duodecimal 
Ages to seek a line emerges Pullulates bit of stratum  of deep struck grief
line adds to line corpus nous crop up contrivance pilus n pore showers delight from soul
under the encumbrance of anguishes in a moment of emancipation from the embryo of poetry it is my rebirth
Embryo - womb Duodecimal - term used for twelve. Pullulates -  cracks Corpus - body Nous - mind
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2. माणूस मी...
तुझ्यासवे सुखी असो तुझा देव उगा मला भेव,... दावू नको
तुझिया देवाला दिला मी आकार भाग्याचा प्रभार,... सोपवला
माझ्या मुठीमध्ये उन, वारा, जल पाषाणचे बल,... पायदळी
कर…
1. From the Embryo of poetry
Gave meaning to anguishes accumulated each of the word for every alphabet a day became years of duodecimal 
Ages to seek a line emerges Pullulates bit of stratum  of deep struck grief
line adds to line corpus nous crop up contrivance pilus n pore showers delight from soul
under the encumbrance of anguishes in a moment of emancipation from the embryo of poetry it is my rebirth
Embryo - womb Duodecimal - term used for twelve. Pullulates -  cracks Corpus - body Nous - mind

2. I'm Human
Be blessed  with your god your fear of fraud doesn't bothers me
I shaped  your God and handed him charges of destiny
My fist contains Warmth, Air, Water Power of centuries  are beneath my feet
Will challenge  Oceans and Mountains pave up ways for the progress
Unconquerable, redoubtable  is my conation wisdom and device Human I am  

3. Trees should ...
To the rumours of whirlwinds trees should not succumb, should restrict branches from mutual abrasiveness without reason shoul…

सापेक्ष - निरपेक्ष

धरती अपनी धुरी पर घूमती है और सूर्य अपनी धुरी पर। धुरी पर घूमने के लिए आकार का वर्तुल होना यानी गोल होना ज़रूरी है। गोल की बजाय चौकोना-तिकोना हुआ तो धुरी लगाएंगे कहाँ! तब तो कोने परस्पर काबिलियत को लेकर ही झगड़ते रहेंगे और धुरी बेचारी लगने के इंतज़ार में पड़ी-पड़ी सड़ जाएगी। लेकिन आकार भर गोल अथवा वर्तुल होने मात्र से इस बात की कतई गारंटी नहीं कि आपमें धुरी लग ही जाएगी। मैंने कइओं गोल-गोल, इधर-उधर ढनगते-लुढ़कते देखे हैं। कई गोल तो धुरी के इंतज़ार में दुनिया से ही गोल हो जाते हैं। पता नहीं कि धरती, सूर्य आदि नवग्रहों ने धुरी का जुगाड़ कैसे और कहाँ से किया, लेकिन भूगोल और विज्ञान की किताबें लिखी जाने के पहले से ही अपनी-अपनी धुरी पर ये सारे ग्रह घूम रहे हैं, तभी तो इन किताबों के लेखकों ने इनका जिक्र इनकी धुरियों के साथ किया। मेरे गोपनीय सूत्रों के मुताबिक धरती, सूर्य आदि नवग्रहों ने दुनिया भर के धर्म-ग्रंथों के लिखे जाने के बाद और गैलेलियो नामक उस शख्स के जन्म के बीच में किसी समय अपने-अपने लिए धुरी का जुगाड़ किया होगा, काश कि इन गोल-मटोलों ने धुरी का जुगाड़ धर्म-ग्रंथों के लिखे जाने के …