गुरुवार, 16 जून 2011

क्योंकि कामठे जी सोते रहे, इसलिए सैकड़ों लोग जागते रहे...


अच्छा हुआ आप यहाँ नहीं हैं, हमारे साथ. अरे साहब हम इस समय महाराष्ट्र की उपराजधानी यानी नागपुर जिले के एक छोटे से गाँव कन्हान में हैं. कन्हान के तुकराम नगर मोहल्ले में किराए से रहते हैं अपन. यदि आप भी कल मेरे साथ यहाँ होते, तो रात भर आपको जागना पड़ता. जी जागना इसलिए पड़ता क्योंकि कामठे साहब सोये हुए थे. 
अब ये कामठे साहब के सोने की वजह से अपने जागने का क्या मतलब? यही पूछना चाहते हैं न आप? तो साहेबान  जान लीजिये की कामठे साहब वो शख्स हैं की जिनकी मर्जी की बिना इनदिनों रातों में सो पाना नामुमकिन हैं. कामठे साहब सोते रहेंगे तो मच्छर आपके यहाँ अपने पूरे कुटुंब के साथ डेरा डाल देंगे. बारिश का मौसम है साहेबान, उमस भी इनदिनों क्या कमाल की होती है, फिर चाहे रात हो या दिन, उमस तो अँधेरा-उजाला देखकर होती नहीं.
कामठे साहब, हमारे 'इलाके' के कतिपय गणमान्य 'लाइनमैनों' में से एक 'लाइनमैन' हैं!! जी लाइनमैन!!!
लाइनमैन यानी ऐसा व्यक्ति जो आपकी रात खराब कर सकता है, आपके सपनों को चकनाचूर कर सकता है. 
पिछली रात यानी १५ जून की रात पूरी दुनिया चंद्रग्रहण का मजा ले रही थी. ये गलती अपन ने भी की. रात के ढाई बजे तक अपन ने भी चंद्रग्रहण का नज़ारा देखा. बस छत से उतरकर घर में जैसे ही दाखिल हुए, बिजली गुल हो गई. वापस छत पर गए तो आधे कन्हान में बिजली दिखाई दी. समझ आया कि अपने मोहल्ले का फ्यूज गया है. बिजली विभाग के दफ्तर फोन घनघनाया गया तो मालूम हुआ कि लाइनमैन से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन उनका 'मोबाइल स्विच ऑफ' बता रहा है. अब बताइये, इन लाइनमैन साहब की रात पाली है और ये जनाब अपना मोबाइल बंद कर आराम से घर में सोये हुए हैं. विभाग के आला अधिकारियों को जब इस बात की जानकारी दी गई और बताया गया कि लाइनमैन फोन बंदकर घर में सो रहा है, तो अधिकारियों का जवाब था, "आइये मिलकर इंतज़ार करें".
और फिर हम सबने मिलकर बिजली विभाग के दफ्तर में ही कामठे साहब का इंतज़ार किया. सुबह सात बजे कामठे साहब सोकर उठे. हाथ-मुंह पर पानी का छींटा रसीद किया और पहुँच गए दफ्तर, क्योंकि आठ बजे उनकी पाली ख़त्म होने वाली थी. दफ्तर पहुँचते ही उन्होंने 'कम्प्लेंट रजिस्टर' का मुआइना कर लिया. "ये क्या तुकाराम नगर में रात ढाई बजे से एक फेस फ्यूज है", लगभग चीखते हुए उन्होंने हैरत प्रगट की और खा जाने वाली नजरों से 'कम्प्लेंट अटेंडेंट' को देखा. फ़ौरन अपनी गाड़ी उठाई और तुकाराम नगर की और चल दिए. वहाँ जाकर उन्होंने फेस दुरुस्त कर दिया. साढ़े सात बजते-बजते तुकाराम नगर में फिर लौट आई बिजली रानी. पुनः दफ्तर लौट कर कामठे साहब ने बड़बड़ाते हुए हम लोगों को सुनाना शुरू किया, "फ्यूज जाता है तो क्या मेरे को बता नहीं सकते आप लोग, मेरे को आप लोग गैर समझते हो! अरे एक फोन नहीं कर सकते आप लोग!!" उनके दुःख को देखकर हमें यानी तुकराम नगर के वासियों और विभाग के आला अधिकारियों को अपनी गलती का एहसास हुआ और हम लोग सर हिलाते और मंद-मंद मुस्कुराते अपने-अपने घरों की और लौटे.
उधर मजमा छंटते ही  कामठे साहब ने गार्ड को हुक्म दिया, "जा बे दोन चाय ला, एक तू पी, एक मेरे को ला, आज की नौकरी बड़ी मुश्किल से बची है साली!!!"

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