गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

हुई सुबह

सिया मिश्र की पेंटिंग 'स्पेसशिप' 


एक लड़की हंसती है
बस की खिड़की से बाहर देखती हुई
तो
छँटने लगती है कालिमा शहर की

दूर कहीं से घनघनाता भोंपू
उछाल देता है सूर्य को आकाश में 

(वर्ष २००७ में प्रकाशित कविता संग्रह 'सो जाओ रात' से)

नाव, नाविक और समुद्र

समग्र चैतन्य - पुष्पेन्द्र फाल्गुन मित्र ने कहा, ‘समंदर कितना भी ताकतवर हो, बिना छेद की नाव को नहीं डुबो सकता है.’ तो मैंने एक क...