मंगलवार, 28 जून 2011

बापू का चश्मा



सेवाग्राम आश्रम से बापू का चश्मा क्या चोरी हुआ, हाय तौबा मचाने वालों की तो निकल पड़ी. किसी ने सेवाग्राम आश्रम समिति को जमकर कोसा कि उन लोगों ने आखिर इतने महीनों तक चश्मे की चोरी छिपाए क्यों रखी? तो किसी ने पुलिस विभाग को कोसा कि अभी तक चश्मे का कोई सुराग नहीं लग सका. 
लेकिन कोई भी उस चोर के बारे में क्यों नहीं सोचता!
वह बेचारा तो बापू का चश्मा चुरा कर कितना पछता रहा होगा?
क्योंकि न तो वह उसे पहन सकता है, न बेच सकता है!!
पहनेगा तो बापू की नज़र से दुनिया देखनी पड़ेगी!!
और बेचेगा तो एक ऐसी चोरी के लिए पकड़ा जाएगा, जिसकी लिए न जाने के लिए कितने लोग उसे दुआएं दे रहे होंगे कि अच्छा हुआ बापू का चश्मा गया, आज नज़र गई है... कल नजरिया भी चला ही जाएगा...
अब यदि चोर पकड़ा गया तो बापू के नज़रिए के जाने की आस लगाए बैठे तमाम लोगों की बद्दुआएं उसकी झोली में!!
मुझे तुमसे सहानुभूति है चोर जी...

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