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ये हैं सबीहा खुर्शीद, नहीं डाक्टर सबीहा खुर्शीद.


ये हैं सबीहा खुर्शीद, नहीं डाक्टर सबीहा खुर्शीद. नागपुर के पास एक छोटे से कस्बे कामठी में रहती हैं. सबीहा ने हाल ही 'उर्दू में माहिया निगारी' पर पी.एचडी. हासिल की है. इस विषय पर अनुसंधान करने वाली वे देश और दुनिया की पहली शख्सियत हैं. पंजाब में लोकगीत के तौर पर माहिया की बड़ी प्रतिष्ठा है. लेकिन पंजाबी में माहिया के आगाज़, इर्तेका और उर्दू में इसके इब्तेदा के साथ उर्दू में होने वाले वजन और मेज़ाज़ को सबीहा ने अपने अनुसन्धान का विषय बनाया. उन्होंने माहिए के लिए किये जाने वाले तजुर्बात को भी निशान ज़द किया और माहिया कहने वालों को उनके इलाकाई हवाले से उजागर किया है. सबीहा के अनुसन्धान में मगरीबी दुनिया के माहिया निगार, हिन्दुस्तान के माहिया निगार, पकिस्तान के माहिया निगार तफसील से अपनी जगह बनाए हुए हैं. उर्दू माहिए के बानी हिम्मत राय शर्मा और इस तहरीक के रूह-ए-रवां हैदर कुरैशी तक, सभी से सबीहा आपका परिचय पूरी शिद्दत के साथ कराती हैं.
सबीहा एक बुनकर के घर पैदा हुईं और तमाम जद्दोजहद के साथ अपनी शिक्षा को उन्होंने एक मुक्कल मुकाम तक पहुंचाया है. अपने घर में पढ़ने-लिखने का जुनून रखने वाली पहली ही शख्स बनीं, जिससे एक बहन और एक छोटे भाई ने भी शिक्षा को अपने जीवन लक्ष्य पाने का जरिया बनाया. सबीहा के सबसे बड़े भाई शहीद युसूफी गैस-बत्ती का छोटा सा कारोबार करते हैं और अपनी सीमित कमाई से इतना इंतजाम जरूर करते रहे कि सबीहा की पढ़ाई और पी.एचडी. में ज़रा भी बाधा न आये.
सबीहा को राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज विश्विद्यालय यानि नागपुर विश्वविद्यालय जल्द ही 'उर्दू में माहिया निगारी के लिए 'पी.एचडी.' प्रदान करने जा रहा है. सबीहा को अशेष-अनंत शुभकामनाएं...

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सत्य तक पहुँचने-पहुँचाने का प्रयास है गीतांजलि

११ मई २०११ को नागपुर के दीनानाथ हाईस्कूल में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की १५० वीं जयंती के निमित्त युवा कवियों के विचार नामक कार्यक्रम आयोजित हुआ. इसमें श्री अरिंदम घोष, श्रीमती इला कुमार, श्रीमती अलका त्यागी, श्री अमित कल्ला के अलावा मैंने यानि पुष्पेन्द्र फाल्गुन ने भी अपने विचार रखे. मैंने वहाँ जो कहा, वह आपके पेशे-खिदमत है. पढ़कर कृपया अपनी राय से अवगत कराएं...

रवीन्द्रनाथ टैगोर की कालजयी काव्यकृति गीतांजलि को यदि मुझे एक वाक्य में अभिव्यक्त करना हो तो मैं कहूँगा, 'सत्य तक पहुँचने-पहुँचाने का प्रयास है गीतांजलि।' गुरुदेव रवीन्द्रनाथ के किसी कविता की ही पंक्तियां हैं;
सत्य ये कठिन
कठिनेरे भालोबासिलाम
से कखनो करे ना बंचना
(सत्य तो कठिन है, लेकिन इस कठिन से ही मैंने प्रेम किया, क्योंकि यह सत्य कभी वंचना नहीं करता।)

      गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का समूचा साहित्य फिर चाहे वह काव्य हो, नाटय हो, कथा-कादंबरी हो, हर कहीं सत्य ही उद्भाषित होता है, सत्य ही उद्धाटित होता है, सत्य की ही पक्षधरता है। गीतांजलि में सत्य की पक्षधरता के साथ-साथ सत्य प्राप्ति के उपाय सर्वाधिक प्रखर हैं। प्रखरत…

दूध वाला भैया

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वह रोज गाँव से शहर आता है दूध बेचने। पहले साइकिल से आता था, लेकिन इधर एक साल पहले जब उसने दाढ़ी वाले नेताजी के मुंह से विकास का नाम और मतलब सुना था, तब से वह रात दिन अपने विकास की फ़िक्र में घुलने लगा था, लिहाजा उसके बाप ने उसकी शादी कर दहेज़ में एक मोटरसाइकिल मांग ली। तो वह अब दूध बेचने मोटरसाइकिल पर गाँव से शहर आता है।
अभी चार-पांच दिन पहले की बात है। अखबार में छपा था कि भीषण गर्मी पड़ रही है। तापमान ४७ डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था। उस दिन, वह अपनी मोटरसाइकिल से दूध देने शहर की और भागा जा रहा था। अचानक शहर से दस किलोमीटर पहले उसकी मोटरसाइकिल भुक-भुक कर बंद पड़ गई। अभी वह नीचे उत्तर कर यह समझने की कोशिश ही कर रहा था कि कल रात दस बजे तक अच्छी चलने वाली मोटरसाइकिल, आज अचानक क्यों बंद पड़ गई कि सड़क से गुज…

मेरी दिनचर्या

जिस रोज़ मैं गलतियां करता हूँ, उस रोज़ मैं दूसरों की गलतियां सहजता से नज़रंदाज़ कर देता हूँ... जिस रोज़ मैं गलतियां नहीं करता, दूसरों की एक गलती भी मुझे नागवार गुजरती है... :) :)) :)))