मंगलवार, 8 मार्च 2011

अनुग्रह



मेरी ही तरह
हर पुरुष के वजूद की वजह
एक स्त्री है.

मेरी ही तरह
हर पुरुष
जन्मा है अपनी माँ की कोख से

और जन्मते ही उसने पिया है माँ का दूध

एक स्त्री के इस अनुग्रह की याद
हम पर बनाए रखती है 
ममता की छांह ताउम्र
फिर चाहे माँ रहे या न रहे

(शीघ्र प्रकाश्य कविता संग्रह 'चेतुल' से)

नाव, नाविक और समुद्र

समग्र चैतन्य - पुष्पेन्द्र फाल्गुन मित्र ने कहा, ‘समंदर कितना भी ताकतवर हो, बिना छेद की नाव को नहीं डुबो सकता है.’ तो मैंने एक क...