शनिवार, 19 मार्च 2011

रंग-आनंद

१० वर्षीय दिया मिश्र की पेंटिंग 'कलर्स एंड कलर'

यह समय का तिलिस्म है
कि जन्मजात कौशल
कि मुस्कुराते ही मेरे खिल उठते है जहान् के सारे रंग।

इक तुम्हारे प्यार का रंग
इक तुम्हारे धिक्कार का रंग
इक तुम्हारे इसरार  का रंग
इक तुम्हारे अबरार का रंग

इक तुम्हारे हौंसलों का रंग
इक तुम्हारे मौसमों का रंग
इक तुम्हारे चोचलों का रंग
इक तुम्हारे जुल्मों का रंग

इक तुम्हारे खेलने का रंग
इक तुम्हारे धकेलने का रंग
इक तुम्हारे खोलने का रंग
इक तुम्हारे बिखेरने का रंग

इक तुम्हारे खुशी का रंग
इक तुम्हारे हँसी का रंग
इक तुम्हारे कुशी का रंग
इक तुम्हारे फँसी का रंग

इक तुम्हारे ताकत का रंग
इक तुम्हारे हिकारत का रंग
इक तुम्हारे लानत का रंग
इक तुम्हारे सियासत का रंग

इक तुम्हारे बोझ का रंग
इक तुम्हारे सोच का रंग
इक तुम्हारे सोझ का रंग
इक तुम्हारे मोच का रंग

और ये सारे रंग बमक उठते हैं जब
तुम भी मुस्कुराते हो, मेरी मुस्कुराहटों में!

- पुष्पेन्द्र फाल्गुन
 

नाव, नाविक और समुद्र

समग्र चैतन्य - पुष्पेन्द्र फाल्गुन मित्र ने कहा, ‘समंदर कितना भी ताकतवर हो, बिना छेद की नाव को नहीं डुबो सकता है.’ तो मैंने एक क...