मंगलवार, 8 मार्च 2011

सिया की 'गुड़िया'



मेरी सबसे छोटी बिटिया सिया दहलीज़ पर खड़ी जाने क्या सोच रही है, क्या वह अपने भवितव्य को लेकर चिंतित है! उसके पैरों पर सूर्य किरणें कुछ इस तरह से बिखरी हैं कि मानों उसे रश्मियों के रथ पर लेकर परी-लोक जाना चाहती हों. बिटिया भी तो 'बैग' लेकर तैयार है और उसके 'बैग' से यह कौन झाँक रहा है!, ये तो सिया की 'गुड़िया' है...

नाव, नाविक और समुद्र

समग्र चैतन्य - पुष्पेन्द्र फाल्गुन मित्र ने कहा, ‘समंदर कितना भी ताकतवर हो, बिना छेद की नाव को नहीं डुबो सकता है.’ तो मैंने एक क...